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राज्यसभा सांसद बनते ही आरोपों से घिरे अनुराग शर्मा, चुनावी हलफनामे में संपत्ति छिपाने के आरोप

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राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के खिलाफ चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने की शिकायत
धर्मशाला की अधिवक्ता निताशा कटोच ने निर्वाचन आयोग और राज्यसभा सचिवालय में दर्ज कराई शिकायत
भाजपा नेताओं ने भी मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई


हिमाचल प्रदेश से निर्वाचित राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा के खिलाफ नामांकन प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। धर्मशाला की अधिवक्ता निताशा कटोच ने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अनुराग शर्मा ने नामांकन के दौरान अपने चुनावी हलफनामे में संपत्ति से जुड़ी पूरी जानकारी प्रस्तुत नहीं की और चुनावी नियमों का उल्लंघन किया है।

शिकायत में कहा गया है कि गांव बीड़, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा निवासी अनुराग शर्मा को 7 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया था। लेकिन उनके नामांकन के साथ दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी सभी संपत्तियों का पूरा और सही विवरण नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 33 के तहत अनिवार्य है कि उम्मीदवार अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा विवरण हलफनामे में दर्ज करे।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उम्मीदवार की भूमि संपत्तियों का विवरण हलफनामे में सही तरीके से नहीं दिया गया। इसके अलावा लाइसेंसी हथियार से संबंधित जानकारी भी नामांकन के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन तथ्यों के बावजूद विधानसभा सचिव की ओर से जल्दबाजी में जीत का प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

अधिवक्ता निताशा कटोच ने अपने शिकायत पत्र में यह भी कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकारी अनुबंध या ठेके लंबित हों, तो उसकी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था। उन्होंने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने भी इस मामले को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को कांग्रेस ने एक साधारण कार्यकर्ता बताकर राज्यसभा का टिकट दिया, उसके शपथपत्र में लगभग 230 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का उल्लेख सामने आया है। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में उनके पास कई करोड़ रुपये के सरकारी ठेके भी हैं और इस पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने एक सैद्धांतिक निर्णय लेते हुए राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था, जिससे कांग्रेस को निर्विरोध जीत का अवसर मिला। बावजूद इसके कांग्रेस के भीतर राज्यसभा टिकट को लेकर असंतोष और भ्रम की स्थिति देखने को मिली। उन्होंने दावा किया कि कई वरिष्ठ नेता दिल्ली जाकर टिकट के लिए प्रयास कर रहे थे और अंत में फैसले को लेकर पार्टी में असंतोष भी सामने आया।

उधर भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने भी इस विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि अनुराग शर्मा को जारी किए गए जीत के प्रमाण पत्र को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। राणा ने कहा कि शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 9ए का हवाला देते हुए उम्मीदवार की उम्मीदवारी को अयोग्य ठहराने की मांग भी की है।

राणा के अनुसार शिकायत में यह दावा किया गया है कि उम्मीदवार के हलफनामे में स्वयं यह उल्लेख है कि उनका मुख्य व्यवसाय सरकारी ठेकेदारी है और उनके कई सरकारी ठेके जारी हैं। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार उम्मीदवार की पात्रता पर सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यही तथ्य पहले रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष भी रखे गए थे और उनसे कानून के अनुसार हलफनामे और दस्तावेजों की जांच करने का अनुरोध किया गया था।

अब यह मामला निर्वाचन आयोग और संबंधित संस्थाओं के समक्ष पहुंच गया है। यदि शिकायत पर जांच होती है तो राज्यसभा चुनाव से जुड़े इस विवाद में आगे और राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।